हार..

सुना है बहुत आसान है हार मान लेना..
पर एक दफा उनसे पूछकर तो देखो।।
कहते हैं जो हार गया वो कमज़ोर..
उनकी जोश-ए-दास्तां सुनकर तो देखो।।
कोई यूं ही नहीं हार जाता..
बिना वजह अपना खुद मार जाता।।
कोई तो वजह रही होगी..
ज़रा अपना नहीं, उनका सोचकर तो देखो।।

क्या मालुम क्या हुआ था..
क्या पता कितना सहा था।।
कितनी बार गिरे होंगे..
जो उठने से घबराने लगे।।
न जाने कितनी दफा मरे होंगे..
जो जीने से कतराने लगे।।

हारना भी आसान कहां, रोज़ रोज़ का मरना है।।
ज़िन्दगी की हर ठोकर को साथ लेकर चलना है।।
एक बार खुद को रखकर तो देखो उनकी जगह..
क्या तुम इस जोश में जल पाओगे?
जहां दूर दूर तक कोई मन्ज़िल नहीं..
एसी बेचांद राह पर चल पाओगे?
कहते तो हैं हारना विकल्प नहीं
क्या तुम विकल्प ढूंढ लाओगे?

सब के बस की बात नहीं हारना
कभी तुम भी अहमियत समझ जाओगे।।

Avneet Kaur

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14 thoughts on “हार..

  1. Kya tum bechand rah par chal paoge!!😍😍😍😍😍😍😍😍😍😍 Woww!!
    Reading it was a surreal experience.. great work! Amazing! Keep writing..😊😍😍
    Please do check out my work whenever you get some time. Hope u like it🤞😄

    Liked by 1 person

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